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अपनी पहली मुलाक़ात ..!!

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वो हमारी पहली मुलाक़ात , हमें आज भी याद है, तेरा वो बचपना , तेरा वो बात बात में डांटना ..!! वो तेरा मेरे बगल में आके बैठ जाना फिर वो तेरा आहें भरना ..! मेरे करीब आके फिर तेरा दूर जाना , मुझे छेड़ के बदमाशियां करना ..!! वो तेरा अपने लबों को मेरे लबों के पास की शरारत ..! फिर मेरे तेरे लबों को चूमने की वो नजाकत ....!! वो मेरा तेरी गोद में सिर रख के तुझे घूरना ..! फिर बार बार नजरे मिलाके नजरों को झुकाना....!! फिर एक दूसरे को टकटकी लगाके देख के मुस्कुराना ..! फिर एक दूसरे को बाँहों में लेकर लम्बी साँसे भरना ...!!. एक दूसरे में इस कदर खो जाना की क्या कहेगा जमाना...! मुझे अभी तक याद है वो हमारी पहली मुलाक़ात का छोटा सा नजराना...!! आपका, आनंद 

एक सुखद यात्रा पूर्णिया से बैंगलोर तक की...!!

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बात उन दिनों की है   जब हम छुट्टियों में अपने घर पूर्णिया आये हुए थे , छुट्टियां ख़त्म हुई और  हम घर से वापस बैंगलोर को आ रहे थे .. मार्च का महीना था .. थोड़ी गर्मी पड़ने को थी , पसीने में लथ - पथ थे .. गाडी अपने समय से पहले स्टेशन पहुंच चुकी थी .. हम अपने पापा के साथ थे जो हमें   छोड़ने को स्टेशन तक आये हुए थे,,.कुछ देर पापा हमारे साथ हमारी बगल वाली सीट पर बैठे , फिर गाडी ने हॉर्न (सिटी ) दी ..उसके बाद मैंने पापा को प्रणाम किया और उनसे इज़ाज़त मांगी की जल्द ही फिर वापस आऊंगा इस बार और थोड़े दिन हाथ में रखूँगा इतने में एक लड़की यही कोई २३ - २४ साल उमर रही होगी हांफती हुई .. अपने दुप्पटे से चेहरे को पोछती हुई   हमारे कोच के दरवाजे के पास खड़ी थी   शायद  उसे भी उसी ट्रैन से   सफर करना था .. पर वो सामान लेकर दरवाजे पे क्यों खड़ी थी ये मेरी समझ से परे था ..कुछ देर रुक कर जो मन के अंदर सवाल उठ रहे थे हमने आखिर पूछ ही लिया  आप यहाँ क्यों खड़े हो? कुछ देर में गाडी रवाना हो जाएगी जल्दी से ऊपर आ...

एक अंतिम पत्र आपके नाम....!!

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तुझे खुद से ज्यादा सम्मान दिया मैंने, तुझे खुद से ज्यादा चाहा था मैंने,, तेरी हर बातों को सर आँखों पे लिया था मैंने, तेरी हर एक चीज़ को प्राथमिकता दी थी मैंने.. भूल जाऊं जो नाम एक पल के लिए तुम्हारा न होगा.. तुम भी कही अपनी दुनिया बसाओगे फिर से  पर हमारे बिना तुम्हारा भी गुज़ारा ना होगा.. तेरी आँखों से भी फिर से बरसातें ही होंगी, जो तेरी आँखों के आगे ये नज़ारा ना होगा, तेरे कानो में गुन्जेंगे ये अल्फाज़ मेरे, इतनी आवाज़ देंगे जितना किसी ने तुझे पुकारा ना होगा. दिल के ज़ज्बातों को कागज़ पर उड़ेलोगे तुम भी, कांपेगी उंगलियाँ और कोई सहारा ना होगा, जब भी मिलेगा कोई ख़त तुझे गुमनामियों मे, ख्याल आएगा मेरा पर वो ख़त हमारा ना होगा.                                                     धन्यवाद,                                      ...

हमारे रिश्ते का नाम क्या है ?

आज चलो हम अपने रिश्ते के बारे में पूछते हैं ..खुद से ..!! कभी सोचा है तुमने, हमारे रिश्ते का नाम क्या है ? मोहब्बत,ज़रूरत, ख्वाहिश, जुनून, इश्क़ .या.... वो रिश्ता जो, आसमान का ज़मीन से है बारिश का सेहरा से है हक़ीकत का खवाबों से है दिन का रात से है ये भी कभी एक दूसरे से मिल नही सकते लेकिन एक दूसरे के बगैर अधूरे भी हैं शायद ऐसा ही कुछ रिश्ता मेरा और तुम्हारा भी है... आपका, आनंद 

कितना है मुझ से प्यार लिख दो....!!

कितना है मुझ से प्यार लिख दो.... कटती नहीं ये ज़िन्दगी अब तेरे बिन, कितना और करूँ इंतज़ार लिख दो. तरसते रहे हैं बड़ी मुद्दत से, इस बार अपनी मुहब्बत का इज़हार लिख दो. दीवाने हो जाएँ जिसे पढ़ के हम, कुछ ऐसा तुम मेरे यार लिख दो. ज्यादा नहीं लिख सकते तो मत लिखो तुम, मुहब्बत भरे लफ्ज़ दो चार लिख दो. एक बार लिखो मुहब्बत है तुम्हे मुझ से, फिर यही जुमला बार बार लिख दो.... आपका, आनंद