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अक्टूबर जंक्शन - दिव्य प्रकाश दुबे

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मैं एक इंजीनियरिंग का छात्र रहा हूँ, लेकिन साहित्य से मेरा रिश्ता बहुत पुराना और आत्मीय रहा है। जब भी ज़िंदगी की भागदौड़ में खुद से दूर होता जाता हूँ ,तो मैं इस पुराने दोस्त—किताबों—को गले लगा लेता हूँ। जब मन बोझिल हो, जब समझ न आए कि क्या करूँ, तब एक अच्छी किताब मेरे लिए सहारा बन जाती है। शब्दों के साथ बिताया गया वह समय सिर्फ़ मन बहलाता ही नहीं, बल्कि भीतर कहीं गहराई में ठहराव भी पैदा करता है। साहित्य से दोस्ती करने का यही तो जादू है—यह आपको रुकना सिखाता है, साँस लेने की मोहलत देता है, और उस शांति से मिलवाता है जिसे हम अक्सर इस तेज़ रफ़्तार दुनिया में नज़रअंदाज़ करते चले जाते हैं। इसी प्रेम और अपनापन के साथ मैं अक्टूबर जंक्शन को पढ़ने बैठा, और शायद यही वजह है कि यह कहानी मुझे सिर्फ़ पढ़ी हुई नहीं लगी, बल्कि महसूस की हुई लगी… "अक्टूबर जंक्शन " चित्रा पाठक और सुदीप यादव की एक बेहद ख़ूबसूरत कहानी है। दोनों की पहली मुलाक़ात 10 अक्टूबर को बनारस के एक छोटे-से कैफ़े में होती है—जहाँ किताबों की खुशबू और बातों की गर्माहट धीरे-धीरे दो अनजानी ज़िंदगियों को जोड़ देती है। पढ़ने का शौक द...

गुनाहों का देवता - धर्मवीर भारती

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इंजीनियरिंग का छात्र होने के वाबजूद हमें साहित्य से बहुत लगाव है, कई वर्षों के बाद फिर से किताब उठाई है , अपने इस साहित्यिक दोस्त से फिर से दोस्ती कर ली है हमने , कहते है जब आप साहित्य पढ़ते है तो "आप" आप नहीं रह जाते , हर किसी को अपने जीवन में साहित्य को शामिल जरूर करना चाहिए।  इस बार जो किताब हमने शुरू करी वो थी धर्मवीर भारती जी की " गुनाहों का देवता " ये धर्मवीर जी की कालजयी रचना है , ओह मुझे नहीं पता इसे मैने खत्म किया ये किताब ने मुझे खत्म, पद्मश्री से सम्मानित धर्मवीर जी ने ये किताब महज २३ साल की उम्र में लिखा था ,लेखकों ने कहा कमजोर कृति है और आज सबसे ज्यादा पढ़े जाने वाले उपन्यासों में एक है ये , प्यार ,समर्पण, त्याग का अनूठा उदाहरण चन्दर और सुधा की कहानी । कहानी के चार मुख्य किरदार हैं. हीरो चन्दर, प्रेमिका सुधा, और चंदर की दो और दीवानी बिनती और पम्मी. गुनाहों का देवता की पूरी कहानी इन्हीं किरदारों के इर्दगिर्द घूमती है. चन्दर यानी इस प्रेम कहानी का हीरो सुधा के प्रोफेसर पिता के प्रिय छात्रों में से एक है  कहानी काफी साधारण हैं । चन्दर एक गरीब परिवार से हैं...

तनाव को दूर करने के 13 टिप्स

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१. समय से सोए, समय से जगे, यदि आप वर्किंग प्रोफेशनल है तो 8 घंटे जरूर से अच्छी साउंड स्लीप ले ।। २. मेडिटेशन जरूर करे, यदि आपको नींद नहीं आती है, स्लीपिंग डिस्टर्बेंस है तो जब आप बेड पर जाय, उससे पहले अच्छी तरह से हाथ मुंह धोए, पैरों को धोएं ।। ३. 5 मिनट भगवान का ध्यान करे, साथ ही कल की प्लानिंग जरूर करे, इससे आप कल को लेकर के फोकस्ड रहेंगे ।। ४  जब आप बेड पर सोने जाय, मेडिटेशन संगीत (music) जरूर लगाएं ,धीमी आवाज में इससे आप पाएंगे अलग ही दुनिया में धीरे धीरे आप जाएंगे साथ जल्दी और अच्छी नींद आएगी।। ५.सुबह या शाम जब भी आपको टाइम मिले आप २० मिनट थोड़ा वॉक जरूर करे।। ६.अपनी दैनिक क्रिया को अपनी डायरी में लिखने का प्रयास करे, यदि संभव हो तो डेली नहीं तो साप्ताहिक जरूर।। ७.कुछ दिन के लिए जहां आप रह रहे है, उस जगह से एक वीक का छुट्टी ले साथ ही किसी अच्छे जगह जाएं , जहां भी आपको पसंद हो ,घूम के आए, हो सकता है आपको पहाड़ , झड़ना , प्रकृति, समुन्द्र पसंद हो, जहां भी जाना पसंद थोड़ा टाइम अपने को दे, अपनों को दे , परिवार के साथ घूमने निकले।। ८. यदि आप किसी अवसाद से ग्रसित है तो मनोरोग चिकित्...

एक आस ..।।

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वो सुबह कभी तो आएगी, वो सुबह कभी तो आएगी, जब हम बंद घरों से होंगे बाहर, वहीं चहल कदमी  फिर सुन आएगी। फिर सभी स्वतंत्र हो घूमेंगे , ना कोई फिकर ना कोई चिंता होगी, वो सुबह कभी तो आएगी, वो सुबह कभी तो आएगी।। यूं तो इस कदर घरों में बैठना , अच्छा है प्रकृति के लिए , आवो हवा भी हो रही साफ , स्वच्छंद नदियों के लिए। पर उनका क्या  ? जो हम पर ही निर्भर होते  रोजी रोटी के लिए, हम यहां हो रहे खुश,और कहते -  चलो अच्छा है, अपनों के लिए।। और "वो"  इसलिए चिंतित हैं, कि एक और दिन ना गुजर जाए भूख के मारे। हां वो दिन ही तो गुज़ार रहे इस आश में की चल कर पहुंच पाए अपनों तक मारे - मारे।। हां साब ।। जिस मजदूर ने इतने बड़े बड़े शहर बसा दिए , वो आज मजबूर हो गए, हो गए वो "मजबूर" इस शहर को छोड़ने को, जिसे वो अपना मान बैठा था। आज "हालात ए मजबूरी "ना होती तो यूं इस कदर यहां वहां ठोकरें ना खाते। यूं ,इस कदर इनकी मौतें ना होती,उसी सड़क पर जिसे इसने खुद बनाया था।। हे ईश्वर अब अपनी क्रोध की अग्नि को करो शांत, हम अबोध अब खड़े है सामने जोड़े दोनों  हाथ।। एक आस के साथ...

कोरोना युग में बैंगलोर।।

यूं तो मै इतनी सुबह कभी उठता नहीं, चलो आज आप लोगो को इस कोरोना युग ( जी हां हम इसे कोरोना युग कह सकते है, ये एक ऐसी वैश्विक महामारी है जिसने विश्व के कई देशों को अपना शिकार बना लिया)                  यूं तो बैंगलोर में कभी पहले ना हमने इतनी शुद्घ हवा में सांस ली और ना ही रातों के वक़्त कभी गगन में टिमटिमाते तारों को एक टक देखा , हां हमने यहां लगभग एक दशक अब पूरा कर लिया है, हमने बैंगलोर को इस कदर इंन एक दशक में बदलते देखा है ,मानो हम और हमारे जैसे व्यक्ति जो अपनी स्वार्थ वश इस शहर को नष्ट करने में अपना योगदान दिया हो।। बैंगलोर आज दूसरे महानगर की भांति अपने को उस गति से अग्रसित कर रहा है, चाहे बड़े बड़े अपार्टमेंट हो ( क्यों ना हम पेड़ पौधों को जंगलों को उपजाऊ जमीन को हटा कर बनाया हो) , सड़के, मार्केट, हर चीज यहां तीव्र गति से बढ़ी है।        मुझे समझ नहीं आता इस कोरोना युग में प्रकृति का धन्यवाद करूं, या परम पिता परमेश्वर का शुक्रिया अदा करूं, जिन्होंने हम मानव को जब बनाया होगा ,उन्होंने भी कभी ऐसा सोचा ना होगा कि हम मा...

"तुम्हारे साथ "

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आज   बहुत   दिनों   के   बाद   दिल   किया   कुछ   लिखने   को ,  यूँ   तो   प्यार   की   कोई   भाषा   नहीं   होती   है   फिर   भी   इन्हे   शब्दों   का   रूप   देने   की   जुर्रत   कर   रहा   हूँ ...!!  ये   चंद   पंक्तियाँ   समर्पित   है   उस शख्श के लिये जो मेरी अर्धांगिनी है ...!! मेरी हर धड़कनों में तुम ही हो,  जीवन   की   संगीत   भी   तो   तुम   ही   हो  .. लड़ना - झगरना ,   बातों - बातों में चुप हो जाना, पर   इन   सभी   का   हक़दार   भी   तो   तुम   ही   हो  ...!! . सुबह की पहली किरण देखना पसंद है , मुझे सिर्फ तुम्हारे साथ , चाय की चुस्की के साथ " सुर्र - सुर्र " की आवाज़ करना पसंद है , मुझे सिर्फ तुम्हारे साथ ...!! अभी तो बहुत दूर तलक जान...

अपनी पहली मुलाक़ात ..!!

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वो हमारी पहली मुलाक़ात , हमें आज भी याद है, तेरा वो बचपना , तेरा वो बात बात में डांटना ..!! वो तेरा मेरे बगल में आके बैठ जाना फिर वो तेरा आहें भरना ..! मेरे करीब आके फिर तेरा दूर जाना , मुझे छेड़ के बदमाशियां करना ..!! वो तेरा अपने लबों को मेरे लबों के पास की शरारत ..! फिर मेरे तेरे लबों को चूमने की वो नजाकत ....!! वो मेरा तेरी गोद में सिर रख के तुझे घूरना ..! फिर बार बार नजरे मिलाके नजरों को झुकाना....!! फिर एक दूसरे को टकटकी लगाके देख के मुस्कुराना ..! फिर एक दूसरे को बाँहों में लेकर लम्बी साँसे भरना ...!!. एक दूसरे में इस कदर खो जाना की क्या कहेगा जमाना...! मुझे अभी तक याद है वो हमारी पहली मुलाक़ात का छोटा सा नजराना...!! आपका, आनंद